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Sunday, June 18, 2017

PM Modi launches android mobile based application

mobile app launch modi:techniquesandidea.blogspot.com
PM MODI LAUNCHES ANDROID BASED MOBILE APPLICATION
modi application inside view:techniquesandidea.blogspot.com
MODI APPLICATION INSIDE VIEW
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने digital india program के तहत एक कदम और आगे बढ़ाते हुए नई दिल्ली में एंड्राइड मोबाइल आधारित Narendra Modi Application लांच किया। इस एप्लीकेशन का उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी से सीधे जुड़ना है । इस app के माध्यम से जरूरी जानकारी तत्काल अपडेट करने के साथ मोदी के मेसेज और ईमेल भी सीधे प्राप्त करने का मौका मिलेगा। इस ऍप्स के जरिये मोदी के ताजा ट्वीट और ब्लॉग को भी पढ़ा जा सकता है और जरूरत पढ़ने पर अपने विचार भी साझा किये जा सकते है। इस एप्प पर मोदी की बायोग्राफी के साथ उनकी सरकार द्वारा अब तक किये कार्यों को भी पड़ा जा सकता है। android अधारित इस एप्प को आप google play store से भी डाउनलोड कर सकते हैं। डाउनलोड करने के लिए लिंक नीचे दिया गया है...............

Sunday, November 6, 2016

इंडियन बोन फिलर जोड़ेगा चूर हो गयी हड्डियों को भी

किसी हादसे में यदि आपकी हड्डी बुरी तरह टूटकर चूर-चूर हो गयी है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके इलाज के लिए जिस महंगे विदेशी बोन फिलर का इस्तेमाल किया जाता था, उसके स्थान पर BHU और IIT के विशेषज्ञों ने सस्ता Indian Bone Fillar(इंडियन बोन फिलर) तैयार कर लिया है। बाहर से आने के कारण विदेशी बोन फिलर की कीमत ढाई से तीन हजार रुपये प्रति ग्राम तक होती है, जो काफी महंगा है, जबकि यहाँ बना बोन फिलर विदेशी बोन फिलर के मुकाबले एक चौथाई तक सस्ता होगा। इंडियन बोन फिलर के लिए आई.आई.टी. में करीब 200 सैंपल बनाये गए हैं। इसके पेटेंट के लिए भी आवेदन किया गया है। इसके निर्माण के लिए कुछ कम्पनियां आगे आयी हैं, अगर सब कुछ ठीक रहा तो एक या दो वर्ष में ही इंडियन बोन फिलर इलाज के लिए बाजार में आ जायेगा। भारत सरकार के मेक इंडिया के तहत यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।
गड्ढे को भी भरता: किसी हादसे में जब सिर्फ हड्डी ही टूटती है तो उसको स्टील या पोलीमर लगाकर ही जोड़ दिया जाता है, लेकिन जब उसका चूरा हो जाता है तो चोट के स्थान पर गड्ढे भी हो जाते हैं। अगर उसे भरा नहीं जाये तो हड्डी ठीक से जुड़ नहीं पाती है और चोट का स्थान भद्दा सा लगता है। इसी समस्या को हल करने के लिए बोन फिलर की जरूरत पड़ती है। कैल्शियम (Calcium) और बोन मिनरल की सहायता से इसे तैयार किया जाता है | 
जुटे हैं कई विशेषज्ञ: केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, आई.आई.टी. के प्रो. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान स्थित हड्डी रोग विभाग, बी.एच.यू. के प्रो. अमित रस्तोगी के निर्देशन में टिश्यु इंजीनियरिंग लैब में इंडियन बोन फिलर बनाया जा है। इनके अलावा भी कई विशेषज्ञ जुटे हुए हैं।
जानवरों पर परीक्षण रहा है सफल: बी.एच.यू. के हड्डी रोग विभाग के प्रो. अमित रस्तोगी का कहना है कि बोन फिलर बनाने के लिए काफी दिनों से कार्य चल रहा है। फिलहाल जानवरों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है, जो काफी सफल साबित हो रहा है। पेटेंट मिलते ही इसका इंसानों पर परीक्षण शुरू कर दिया जाएगा। इससे खराब से ख़राब टूटी हड्डी को भी जोड़ने में भी सहायता मिलेगी।

Sunday, July 12, 2015

अब इंसान सच में बदलेगा गिरगिट की तरह रंग

वाशिंगटन/एजेंसी: सेन्ट्रल फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में भारतीय मूल के वैज्ञानिक देवाशीष चन्दा व उनकी टीम ने मिलकर ऐसी तकनीक बनाई है जिसका उपयोग इंसान के बाल से भी हल्का व महीन डिस्प्ले बनाने में किया जा सकता है। इस तकनीक की मदद से सामान्य कपड़ों का रंग भी बदला जा सकता है और कम बिजली से चलने वाले हल्के ई-स्क्रीन रीडर भी बनाये जा सकते हैं। यह एक ऐसा लचीला डिस्प्ले है जो प्रकाश का कुछ भाग सोख लेता है तथा कुछ भाग परावर्तित कर देता है। डिस्प्ले के लिए जो वोल्टेज चाहिए वह बहुत ही हल्के व इंसान के शरीर के लिये सुरक्षित हैं। एक छोटी सी बैटरी के द्वारा यह प्रक्रिया पूरी होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार डिस्प्ले का रंग बदलने की यह क्षमता वोल्टेज में आये उतार-चढ़ाव से हासिल की जाती है। यह तकनीक लाल, हरे और नीले रंग के सम्मिश्रण से पैदा होने वाले सभी रंग बना सकती है। भविष्य में इसका उपयोग सैनिकों को युद्ध में दुश्मन से छिपाने के लिये रंग बदलने वाले कपड़े बनाने में भी किया जा सकेगा।

Tuesday, June 30, 2015

Important information for LPG consumers, please read!

अगर आपके पास L.P.G. गैस सिलेंडर है तो आप अपने परिवार की सुरक्षा के लिए यह जानकारी अवश्य रखिये.....!!!
(If you have a L.P.G gas cylinder, then you must keep this information for the safety of your family ..... !!!)
  1. क्या आपको पता है कि आपको एल.पी.जी. सिलेंडर के साथ इंश्योरेंस का लाभ भी मिलता है? लेकिन दस में से आठ उपभोक्तओं यह नहीं पता, लेकिन आप यह जान लें कि एलपीजी कनेक्शन के साथ आपका बीमा भी हो जाता है। अगर गैस सिलेंडर से कोई दुर्घटना होती है तो आपको 40 लाख तक का क्लेम मिल सकता है। इतना ही नहीं सामूहिक दुर्घटना की स्थिति क्लेम कि यह राशि 50 लाख तक हो सकती है। इसके अलवाइलाज का सारा खर्च भी गैस कंपनी ही उठाती है, लेकिन प्रायोगिक रूप से ऐसा नहीं हो पाता। जानकारी के अभाव में उपभोक्ता कंपनी को दुर्घटना की जानकारी नहीं देते। कंपनी और सरकार दोनों ही इस जानकारी को उपभोक्ता से छिपाते हैं।
  2. एलपीजी गैस सिलेण्डर की भी "एक्सपायरी डेट" होती है। एक्सपायरी डेट निकलने के बाद गैस सिलेण्डर को इस्तेमाल करना बम की तरह खरतनाक हो सकता है। आमतौर पर गैस सिलेण्डर की रीफिल लेते समय उपभोक्ताओं का ध्यान इसके वजन और सील पर ही होता है। उन्हें सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट की जानकारी ही नहीं होती। इसी का फायदा एलपीजी की आपूर्ति करने वाली कंपनियां उठाती हैं और धड़ल्ले से एक्पायरी डेट वाले सिलेण्डर रीफिल कर हमारे घरों तक पहुंचाती हैं। यहीं कारण है कि गैस सिलेण्डरों से हादसे होते हैं।

~How to Know Expiry Date?


सिलेण्डर के उपरी भाग पर उसे पकड़ने के लिए गोल रिंग होती है और इसके नीचे तीन पट्टियों में से एक पर काले रंग से सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट अंकित होती है। इसके तहत अंग्रेजी में A, B, C तथा D अक्षर अंकित होते है तथा साथ में दो अंक लिखे होते हैं। A अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च), B साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून), C साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्बर) तथा D साल की चौथी तिमाही अर्थात अक्टूबर से दिसंबर को दर्शाते हैं। इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं।यानि यदि सिलेण्डर पर A 11 लिखा हुआ हो तो सिलेण्डर की एक्सपायरी मार्च 2011 है। इस सिलेण्डर का "मार्च 2011" के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है।इस प्रकार के सिलेण्डर बम की तरह कभी भी फट सकते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के एक्सपायर सिलेण्डरों को लेने से मना कर दें तथा आपूर्तिकर्त्ता एजेंसी को इस बारे में सूचित करें !

Saturday, June 27, 2015

Pharma Price Data bank

मोबाइल एप्प से जानें 65 हजार दवाओं के नाम व कीमत: रास्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण (NPPA) द्वारा लांच इस पोर्टल की सहायता से लोग अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से उचित मूल्य की दवा खरीद सकेंगे। अभी तक मार्केट में एक ही साल्ट या फार्मूले से तैयार की गयी दवा विभिन्न नामों से मिलती है व विभिन्न कंपनियां इन्हें तैयार करती हैं। इन दवाओं की कीमत भी अलग-होती है। इस पोर्टल के जरिये उपभोक्ताओं को दवाओं की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। लोग दवाओं का मूल्य देखकर और आपस में कम्पेयर करके दवा खरीद सकेंगे। लोगों को बड़ी कंपनियों की दवा लेने के लिए बाध्य नहीं होना पड़ेगा। अभी तक इस पोर्टल पर 100 बड़ी कंपनियों ने अपनी 35 हजार से ज्यादा दवाओं का रजिस्ट्रेशन करा दिया हैं। कुल 65 हजार दवाओं के फार्मूले इस पोर्टल पर डाले जायेंगे। सभी कंपनियों को अनिवार्य रूप से इन दवाओं के मूल्य भी पोर्टल पर अपडेट करने होंगे। पोर्टल पर आधारित मोबाइल एप्प भी अगले तीन महीनों में आ जायेगा। 

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